लहजा

झगडे फसाद की जड है जुबां का लहजा।.
मोहब्बत बेपनहा बढाता है दिलो मे लहजा।.
सिर्फ लहजे से कई महात्मा बन बैठे है आज।.
इसी के दमपे पाखंडीयों ने पेहने है कलयुग मे ताज।. (अशफाक खोपेकर)

8 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 23/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  4. babucm babucm 23/06/2016
  5. शुभम शर्मा 23/06/2016
    • Ashfaque Khopekar 25/06/2016

Leave a Reply