वीरानो में बना बैठे हैं…

कम्बख़्त ये तन्हाई भी न
कुछ इस क़दर हमें अपना बना बैठी है, के
इसका बसेरा मुझमे नहीं, हम
अपना आशियाना ही वीरानो में बना बैठे हैं…

…इंदर भोले नाथ…
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7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  2. mani mani 22/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 22/06/2016
  5. C.M. Sharma babucm 23/06/2016
  6. Inder Bhole Nath Inder Bhole Nath 23/06/2016

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