बहुत दिनों के बाद

बहुत दिनों के बाद-

सुंदर सजीले परदो के हटते,
कमरे की खिड़की के खुलते,
जो एक उषा की अंकुर फूटी,
जो एक हवा का झोंका आया,
तन को छूआ,
मन को छूआ,
फिर धीरे-धीरे उर में फैल,
गाँठो की जो नगरी बसी थी,
खोल-खोल सारे गाँठो को,
दबे-दबे सारे मैलो को,
उड़ा-उड़ा कर तेज फूंक से,
उर के बाहर दूर धकेला।

बहुत दिनों के बाद –

सारी गीरहें संशय की
मिट-मिट कर उम्मीद बनी थी ।।
दृगो की कोरे लाँघ-लाँघ
हर पीड़ा बह-बह निकली थी ।

बहुत दिनों के बाद –

सजावट के परदे हटा,
खिड़कियों पर जमे धूल को,
झाड़-झाड़ मैंने हटा दिया था ,
अपने उर के द्वार खोल,
अब सत्य को मैंने तार लिया था ।।

बहुत दिनों के बाद –

अब मन हल्का था,
अब तन हल्का था
रोम-रोम,
हिय का कोन-कोन,
अब सब हल्का था ।

अलका

21 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  3. C.M. Sharma babucm 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  4. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  7. mani mani 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  8. Jay Kumar 22/06/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016

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