पहली बार

पहली बार

आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।
मन में बैठी सरस्वती
होंठों पर आकर बैठ गई
पहन गलें में शब्दों का हार ।
आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।
मन झनझना उठा
रोंए नृत्य करने लगे
धुंए का उडऩे लगा गुब्बार ।
आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।
आंखें खुशी से चंचल हुई
होठों पर हंसी फै लने लगी
हृदय में बढऩे लगे विकार।
आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।
लुप्त सी मधुर तान छेड़
आंखों से नुकीले बाण छोड़
हृदय को चीर हुए हैं पार ।
आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।
सुप्त बीज फु टने लगा
मधु स्नेह की बूंदों से
गिरने लगी है मधुर धार ।
आज पहली बार
तुमसे बातें करके
मन वीणा का बजा है तार ।

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  1. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 21/06/2016

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