काली घटाएं

काली घटाएं

आज फिजाओं से होकर
आई हैं काली-काली घटाएं
मिट्टी की सौंधी सुगन्ध लेकर
आई हैं फि र से आज हवाएं ।
मेरे गांव की हरियाली को
और वहां की खुशहाली को
समेट कर बाहों में अपनी
लाई हैं फि र से आज हवाएं ।
मिट्टी की सौंधी सुगन्ध लेकर
आई हैं फि र से आज हवाएं ।
गांव की मेरी चंचल यादें
मां-बाप की वो फ रियादें
एकाएक जहन में मेरे
लाई हैं फि र से आज हवाएं ।
मिट्टी की सौंधी सुगन्ध लेकर
आई हैं फि र से आज हवाएं ।
मां की ममता पिता का प्यार
और उनका सारा दुलार
भरकर अपनी मुट्ठी में ये
लाई उडेलने आज ये हवाएं ।
मिट्टी की सौंधी सुगन्ध लेकर
आई हैं फि र से आज हवाएं ।

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