बरसात और ऊमश

बरसात और ऊमश

आज पानी गिर रहा है
बहुत पानी गिर रहा है
कपड़े गिले हुए नही
क्या खाक पानी गिर रहा है ।
सोचा था गिरेजा आज जमकर
जो तपिस से झुलसा है तन
उसको देगा ये ठंडक
रह गया ये तो थम कर
इसने तो अग्र और बढ़ा दी है ।
क्या खाक ठंडक कर रहा है ।
कपड़े गिले हुए नही
क्या खाक पानी गिर रहा है ।
ऐसी ठंडक से बेहतर तो
वो निराली गर्मी ही थी
लाकर कुछ देर पसीना वो
फि र ठंडक उसने बढ़ा दी
गर्मी इसने और बढ़ा दी
ये कैसा मौसम बदल रहा है ।
कपड़े गिले हुए नही
क्या खाक पानी गिर रहा है ।

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