छूना है चांद को

छूना है चांद को

यदि तेरा प्यारा साथ मिले तो
छूना चाहता हूं आसमान को
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं श्वेत चांद को ।
तुम साथ मिल जाओ अगर तो
कोई चीज मुश्किल न होगी
जो दूर भागती है वह मुझ से
वो हर चीज मेरे पास में होगी
हर दिन रात ये अपनी होगी,
और भला तुम क्या चाहते हो ।
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं श्वेत चांद को ।
हर जगह हर स्थान पर
तेरा मेरा ही राज रहेगा
लोग झुकेंगे सलाम करेंगे
ऐसा हमारा ये नाम होगा
फि र क्या ऐसा काम होगा
जो कभी भी पूरा ही ना हो ।
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं श्वेत चांद को ।

One Response

  1. chandramohan kisku chandramohan kisku 23/06/2016

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