माॅ की मूरत

माॅ की कितनी मूरत प्यारा
उनके चरण में अमृत धारा ।
भूले को वो राह दिखाती
भटके को मंजिल ले आती ।
जीवन जिनका रुठ गया है
सारे सपने जो टूट गया है ।
ए मानव तुम क्यों है हारा
सामने है तेरा जीवन सारा ।
अंधे को आखें मिल जाती
बहरे के बाहों में आती ।
उनकी कितनी महिमा न्यारी
माॅ की ममता कितनी प्यारी ।
बनती है लंगडे का सहारा
कर देती उसको भी किनारा ।
सत्य राह पर चलना सीखो
नूतन फिर से किस्मत लीखो ।
आओ उनको अब तो मनालो
उनका गीत सब मिल गालो ।
कस्ती तेरी भी होगी किनारा
माॅ की मूरत कितना प्यारा ।
बी पी षर्मा बिन्दु

Writer :- Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth : 10.10.1963

6 Comments

  1. babucm babucm 21/06/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/06/2016
  3. mani mani 21/06/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 22/06/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 22/06/2016

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