परदे की बात

परदे में कुछ नहीं है अब परदा कहाॅ है भाई
जो परदो में था पहले वो अदा कहाॅ है भाई ।
दरवाजे में लटक गई अब हया कहाॅ है भाई
जमाना इसे गटक गई अब दया कहाॅ है भाई ।
नातों और रिष्तों के परदे सर से उठ गये हैं
कहाॅ रही वो संस्कृति जो घर से लुट गये हैं ।
देख न पाते चेहरा जिसका तरस खाते वोे वर्षो
लाज लेहाज सम्मान जिसका बीत रहा था अर्षो ।
मर्यादा भूल गये परदे की वो परदा कहाॅ है भाई
जो सम्हाल न पाया इसको वो कदा कहाॅ है भाई ।
जमाना बदल गया या कि लोग बदल गये हैं
कौन सी राह पर न जाने हम आज निकल गये हैं ।
हर नकाब के पीछे अब क्यों लगा है दूसरा चेहरा
रोती विलखती तड़पती क्यों दु ख भरा ये चेहरा ।
कम पडे़ क्या कपड़े तन के ठीक से नहीं जो ढ़कते
नज़रें तंग हुई क्यों जो दिल को नही सजते ।
बचा है सिर्फ छल छलावा अब परदा कहाॅ है भाई
खुल्लम खुल्ला सबकुछ वो रजा कहाॅ है भाई ।

बी पी षर्मा बिन्दु

Writer :- Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth :- 10.10.1963

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 21/06/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 21/06/2016
  3. mani mani 21/06/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/06/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 22/06/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 22/06/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 22/06/2016

Leave a Reply