ज़हर का घूंट ।

शायद इसे ही कहते होंगे, ज़हर का घूंट ?
अश्क बहे उधर, आह भी न भर पाएं इधर..!

अश्क = आँसू; आह = आर्त्तनाद;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ११ जून २०१६.

6 Comments

  1. babucm babucm 21/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/06/2016

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