कर्म कैसा भी हो ?

मैंने की एम ऐ, पी अच डी,
मैँ चपरासी की नोकरी क्यों करू ?
वो मुझसे कम पढ़ा लिखा,
मैँ उसकी चाकरी क्यों करू ?
आरक्षण की उम्र थी दस साल,
जाने क्यों, कैसे इतनी भोग ली ?
सीट तो मुझे मिल जाएगी,
नीची जात का कार्ड दिखा कर,
फिर मैँ पढ़ाई क्यों करू ?
हर किसी को चाहिए नौकरी सरकारी,
भत्ता मिलता हो, मिले सुख सुविधाएं सारी,
निजी नौकरी में, खून है पीते,
पता नहीं किस गलती पे कट जाये पगार सारी ?
कंधे से कन्धा, कदम से कदम मिला,
बेकार जरूरतों को मिटा, खर्चो को कम कर,
कर्म कैसा भी हो ? बस करना होगा,
अपनी सोच बदल, इस देश को बदलना होगा |

8 Comments

    • mani mani 20/06/2016
  1. babucm babucm 20/06/2016
    • mani mani 20/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 20/06/2016
    • mani mani 20/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/06/2016
    • mani mani 21/06/2016

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