साहसी जान

-साहसी जान
मुझमे है एक साहसी जान ़
हर लक्ष्य हो जो करे आसान ़
किसी भी डर से वह ना डरे ़
किसी भी हार से वह ना हारे ़
हिमालय से ऊँची उसकि चाहत ़
समुंद्र से गहरी उसकी बात ़
है अनोखी उसकी शान ़
मुझमे है एक साहसी जान !(1)
सत्य कि राह पर वह चले ़
कभी ना मिले झुठ से गले ़
पथ पर हो चाहे विघ्न बड़े ़
हर मुश्किल से वह लड़े ़
सच्चाई कि है वह खान ़
मुझमे है एक साहसी जान !(2)
संस्कारो कि करे वह कदर ़
कभी ना फेरे जुर्म से नजर ़
धूप मे है वह निर्मल छाया ़
इन्सानियत कि है वह सुन्दर काया ़
सत्य -धर्म है उसका गान ़
मुझमे है एक साहसी जान !(3)
सुबह कि पहली धूप है वह ़
मन -मंदिर का रूप है वह ़
प्रगति पथ पर बढ़ चला है ़
हर वेदो को पढ़ चला है ़
अमर तत्व है उसका ज्ञान ़
मुझमे है एक साहसी जान!(4)
जीवन को उसने दिया सहारा ़
हर मंजिल को दिया किनारा ़
उसने मुझे जीना सिखाया ़
सद्भावना का कर्म सिखाया ़
मन मे शांति भाव जगाकर ़
किस्मत को बदलना सिखाया ़
दया प्रेम है उसका दान ़
मुझमे है एक साहसी जान !(5)

कविता – विनय प्रजापति

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 20/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/06/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/06/2016

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