मंजिल पथ पर बढ़

षीर्शक- मंजिल पथ पर बढ़
मंजिल पथ पर बढ़ ,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ़,
तू अकेला है इस राह मे ,
कोई नही है तेरी चाह मे,
गुमषुदा ना होना जहाॅ मे,
अदृष्य पत्थर है तेरी राह मे,
मुष्किल से ना डर,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ़।
एक इरादा तेरे अंदर,
सपने देखे जिसका मंजर,
जीवन मे तू दौड़ के देख,
पार हो जायेंगे सात समंदर,
हर पर्वत पर चढ़,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ़।
एक बार षुरूआत तू कर,
सपनो से मुलाकात तू कर,
दिल मे जो कलाकार छिपा है,
उससे हर दिन बात तू कर,
मन -से-मन को पढ़,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ़।
कविता- विनय प्रजापति

9 Comments

    • vinay kumar vinay prajapati 20/06/2016
  1. mani mani 20/06/2016
    • vinay kumar vinay prajapati 20/06/2016
  2. आदित्‍य 20/06/2016
  3. C.M. Sharma babucm 20/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 20/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/06/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/06/2016

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