रिश्वत ।

जब भी कभी ठानी, रिश्वत न देने की उसूलों ने,
बेबसी महज देती रही, बेशर्म ललक लेती रही…!

ठानना = निश्चय करना;
उसूल = नियम;
बेबसी = मज़बूरी;
महज =केवल, सिर्फ़;
ललक = लालच;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १७ जून २०१६.

RISHVAT

12 Comments

  1. mani mani 20/06/2016
  2. babucm babucm 20/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/06/2016
    • Markand Dave Markand Dave 21/06/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/06/2016
    • Markand Dave Markand Dave 21/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/06/2016
    • Markand Dave Markand Dave 21/06/2016

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