गजल

गजल

हम तुम्हें देखते रह गये रात भर
तेरा चेहरा ही समझते रहे रात भर ।

हम तो तन्हा तें करवट बदलते रहे
ख्वाब में संवरते रह गये रात भर ।

जिसको छुआ नहीं रूह तक आ गई
दिल मेरा धड़कते रह गये रात भर ।

बे इंतिहां मुहब्बत की क्या बात है
आॅख मेरे ही ठगते रह गये रात भर ।

सवेरा हुआ तब मैं उठ भी गया
क्या क्या देखते रह गये रात भर ।

ये रिष्ता नहीं रस है प्यार का
दिवानगी में वहकते रह गये रात भर ।
बी पी षर्मा बिन्दु

Writer : – Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth : – 10.10.1963

11 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/06/2016
  2. Kajalsoni 20/06/2016
  3. mani mani 20/06/2016
  4. C.M. Sharma babucm 20/06/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/06/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/06/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 20/06/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/06/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/06/2016

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