इश्क करना छोड़ दिया

हमने जिक्र-ए-हाल करना छोड़ दिया
सिलसिला रश्म अदायगी का करना छोड़ दिया

अब भी बहुत है हमको अपना कहने वाले
बस रौनक उसी से थी जिसने कहना छोड़ दिया

आसमान की हवस मे उड़े जा रहे थे
सच्चाई से वाकिफ हुऐ तो उड़ना छोड़ दिया

उसकी नफरत की सम्त से जो गुजरे
हमने तो इश्क ही करना छोड़ दिया

वफा साबित करने को जान नही दी हमने
बस इतना किया कि जीना छोड़ दिया

7 Comments

  1. mani mani 18/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/06/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 18/06/2016
  5. Nirdesh Kudeshiya 19/06/2016

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