मंजिल पथ पर बढ

मंजिल पथ पर बढ ,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ !
तु अकेला है इस राह मे,
कोई नही है तेरी चाह मे,
गुमशुदा न होना जहाँ मे,
अद्रृश्य पत्थर है तेरी राह मे,
मुश्किल से न डर ,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ!
एक इरादा तेरे अंदर ,
सपने देखे जिसका मंजर,
जीवन मे तू दौड़ के देख ,
पार हो जायेगें सात समंदर,
हर पर्वत पर चढ,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ!
एक बार शुरूआत तू कर,
सपनो से मुलाकात तू कर,
दिल मे जो कलाकार छुपा है,
उससे हर दिन बात तू कर,
मन से मन को पढ़,
ओ साथी मंजिल पथ पर बढ़!

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 19/06/2016
    • vinay kumar vinay kumar 19/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 19/06/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 19/06/2016
  5. bhupendradave 19/06/2016

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