तुम अजेय हो! _अरुण कुमार तिवारी

‘तुम अजेय हो!’
_अरुण कुमार तिवारी

हाँ तुम अजेय हो!

देखकर कटे हुए पाहनों के चौड़े सीने,
उनके बीच निकले ये रास्ते,
दम्भ भरती नदियों के उफानों से ऊपर,
उड़कर जा रहे यानों को निहारते,
चीरकर आसमान ,उठती बुर्ज सी मीनारों को|
उठाओ अपना अभिमान!बढ़ाओ दर्प,दम्भ, ज्ञान!
मैं हूँ महान !मैं हूँ महान!

जीर्णित आग्नेय हो!
पर तुम अजेय हो!

पढ़ो अपना इतिहास उठाकर!
कैसे तुमने तलाशे हैं रास्ते,
कभी खुद के नाम पर, कभी औरों के वास्ते!
बनाये पत्थर के औजार, आग से पहिये तक,
जंगल से गाँव तक, सभ्यता-सभ्यता खेलते,
अब शहरों को वीरानों तक धकेलते,
फिर लग चले अपने ही सर्वनाश की व्यवस्था में,
प्रकृति से साँप-सीढ़ी, फिर विकास! फिर विनाश!

कृत्य दृष्टि हेय हो!
हाँ हाँ तुम अजेय हो!

क्यों नहीं दिखतीं तुम्हारे ज्ञान की काली कोपलें हिरोशिमा में?
अब भले इतराओ देखकर, फिर ले लो शान्ति का नोबल!
क्यों भीरु बन छिपते हो यत्र तत्र आपदाओं से?
कहते क्यों तब ‘मानव है नश्वर!’
जब हो इतने ज्ञानी?खुद के ईश्वर!
दुनियां की परिमिति ढूंढते,

तुम स्वयं अपरिमेय हो!
नाप लो! देख लो !अब भी समझ लो!
तुम कितने अजेय हो!
तुम कितने अजेय हो!!

-‘अरुण’
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15 Comments

  1. Gayatri Dwivedi 18/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  3. mani mani 18/06/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/06/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  7. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/06/2016
  9. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  10. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  11. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016
  12. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 18/06/2016
  13. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016

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