किस्से प्यार के आम हो गए

किस्से हमारे प्यार के आम हो गए,
शहर में हम यूँ ही बदनाम हो गए ।
रुसवाई ज़माने से, रूठ वो हमसे गए,
बोल मोहब्बत के इल्जाम हो गए ।
निगाहों की बातें गुजरे हुए दिन,
पहरे ज़माने के सरेआम हो गए ।
लकीरें राहों पर खिंच गईं अमिट,
रास्ते भी अब तो तूफ़ान हो गए ।

विजय कुमार सिंह

12 Comments

  1. अकिंत कुमार तिवारी 18/06/2016
  2. babucm babucm 18/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/06/2016
  4. mani mani 18/06/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 18/06/2016

Leave a Reply