व्यवहार……….

निरन्तर गति को लय दे चल रे प्राणी
बिन लय के शशक नहीं विजय पाते है
बाहुल्य के प्रभाव में दुर्जन हुंकार भरे
सज्जन तो व्यवहार से पहचाने जाते है
बूँद – बूँद से तृप्त हो जाते है पुष्प वृक्ष
प्रबल वेग धारा से किनारे बह जाते है
संयम से काम लेना पहचान ज्ञानी की
उग्र स्वभाव धारण कर शैतान कहलाते है
मंद फुहारों से ही बनता वर्षा का आकर्षण
मेघ फटने से तो शिला भी बह जाते है !!
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डी. के. निवातियाँ ——————-@

24 Comments

    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  1. babucm babucm 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  3. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  4. ALKA प्रियंका 'अलका' 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  5. Inder Bhole Nath Inder Bhole Nath 22/06/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  9. mani mani 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  10. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 22/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/06/2016
  11. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016
  12. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016

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