कयामत प्यार की

दिल नाजुक है जनम से ही
मुर्दा हल्का है कफन से ही
उनको तोड़ो तो कयामत होगी
इनको जोंड़ो तो इनायत होगी
मन चलता है तेज हवा से ही
जान बच जाती है दुआ से ही
दिल नाजुक ।
मुहब्बत नाम है इसी का समझो
नजर का फेरा हंसी का समझो
ये न पूछो कभी दिवानों से ही
प्यार किसी को मैखानों से ही
दिल नाजुक ।
यूं तो प्यार दिलों का मेल है सब
इष्क चलता हुआ एक खेल है अब
प्यार बदनाम इन अफवाहों से ही
कुछ परेषान उनके निगाहों से ही
दिल नाजुक ।
कुछ यादों से कुछ मुलाकातों में
यूं ही रह जाते कोई वादों में
नफरत आती है कभी दिल से ही
दिल टूट जाता कभी महफिल से ही
दिल नाजुक ।
दिखावा कर लेते जो एक धोखा है
प्यार तो सबके लिए एक तोहफा है
जिनको प्यार है अपने वतन से ही
प्यार मिलती अनमोल जतन से ही
दिल नाजुक ।

बी पी षर्मा बिन्दु

Writer :- Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth :- 10.10.1963

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