पड़ाव

रुकना तो पड़ेगा,
अकस्मात, अंजान से रूबरू हो,
किसी अंजानी भाषा पर,
किसी अनजाने शब्द पर,
ज्ञान प्राप्ति या अज्ञानता के बोध पर,
अनजाने दृश्य के दिखने पर,
मन की प्रसन्नता और संताप पर,
मिलने या बिछड़ने पर,
कुछ पाने या खोने पर,
किसी लोभ या क्षय पर,
स्वार्थ सिद्धि की चाह या
परमार्थ प्राप्ति की राह पर,
काँटों के चुभने पर या
फूलों को छूने पर,
रुकना तो पड़ेगा ।

रुकना तो पड़ेगा,
सफर सुहाना हो या बेगाना,
ऊर्जा का रूपांतरण,
शनैः-शनैः विश्राम की ओर बढ़ेगा,
नए सफर के आरम्भ को,
नई ऊर्जा का संरक्षण,
गति प्रदान करेगा,
रात्रि की बेला का आगमन,
सशरीर विश्राम का निमंत्रण,
न रुकने की चाह पर भी,
रुकना तो पड़ेगा ।

विश्राम के उपरांत,
नव प्रभात, नव स्फूर्ति,
गतिमान पल, पग, मन, मस्तिष्क,
निश्चित अंतराल पर,
ऊर्जा का ह्रास गति को नियंत्रित करेगा,
पग, बिना जंजीर के जकड जायेंगे,
पलकें बोझिल हो जाएँगी,
तंत्रिकाओं के नियंत्रण से मुक्त,
आदेश की अवहेलना करेंगी,
जबरन अपने द्वार बंद कर लेंगी,
न रुकने का प्रयास,
विफलता को अग्रसर करेगा,
शरीर का सफर यूँ ही चलेगा,
रुकना तो पड़ेगा ।

आत्मा अतिसूक्ष्म, अतितीव्र,
इतिहास के पृष्ठों में संकलित,
विज्ञानं की दृष्टि से ओझल,
लम्बे अंतराल पर विश्राम,
विश्राम से पूर्व का चक्र,
सफर का लेखा-जोखा,
शारीरिक कर्म की अर्जित पूंजी,
सत्कर्म, दुष्कर्म, माया, मोह,
अदृश्य पटल पर दृष्टिगत,
नए सफर को परिभाषित करते,
रुकना तो पड़ेगा ।

अर्जित पूंजी के विभिन्न रूप,
आत्मा को पुनः ऊर्जा प्रदान करेंगे,
पुनः संरक्षित ऊर्जा के द्वारा,
न्यून, नवीन शरीर की रचना,
आत्मा के नए सफर का आरम्भ,
नए शारीरिक यान के द्वारा,
शरीर के विकाश के साथ,
आत्मा की गति, गंतव्य का निर्धारण,
पूर्ववत के चक्रीय पथों पर गमन,
यान के आयु की समाप्ति,
आत्मा के विश्राम का क्षण,
रुकना तो पड़ेगा ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 17/06/2016
  3. babucm babucm 17/06/2016
  4. विजय कुमार सिंह 17/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 17/06/2016

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