तुम्हारा तन

तुम्हारा तन

तेरे कोमल मखमली बदन पर
सुगन्धित इत्र का महका सांया ।
महका तन-मन सारा मेरा
महकी शीतल ठंडी हवा
फू लों के जैसा स्पर्श तेरा
शोभा सूरज की लाल लाली
पूरा तन खिला है ऐसे ।
जैसे फूलों की हो डाली
आंखें पंखुरी क मल की
जो समुद्र के मध्य है रहता ।
तेरे कोमल मखमली बदन पर
सुगन्धित इत्र का महका सांया ।

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