पे्रमांकुर

पे्रमांकुर

पहली बार जब प्यार से
छुआ था तुमने मुझे ,
वर्षों से सुप्त पड़े बीज में
सैंकड़ों अंकुर फू टने लगे ।
वर्षों से सूखे इस बाग में
सबकुछ सूखा बिन पानी
तुम मेघ बनकर जो छाये
तो थोड़ी सी आश बंधी
पर लाकर बारिश इसमें
इसको सिंचित किया तुमने ।
वर्षों से सुप्त पड़े बीज में
सैंकड़ों अंकुर फू टने लगे ।
अब बारिश हुई है तो
फु लूंगी, गदराऊंगी मैं
एक दिन भरा-पूरा पेड़ बन
मीठा फ ल दे जाऊंगी मैं
आगे की आश बांधी तुमने
हैं प्रियतम स्वीकार मुझे ।
वर्षों से सुप्त पड़े बीज में
सैंकड़ों अंकुर फू टने लगे ।

One Response

  1. babucm babucm 17/06/2016

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