यादें और हवा

यादें और हवा

यादों के सांए से गुजर कर
यूं हवा चुप चली जाती है
जैसे प्यासी आंखों को शबनम
मिलकर बिछुड़ जाती है ।
यह शीतल मनमोहक पवन
ताजगी भरे उत्साहित मन को
अन्दर से खदेड़ जाती है ।
यादों के सांए से गुजर कर
यूं हवा चुप चली जाती है।
मन को देकर विचार नया
मुस्कुरा चंचल उजली हवा
प्रेम राग गाकर चली जाती है ।
यादों के सांए से गुजर कर
यूं हवा चुप चली जाती है ।
उनकी यादों का मंजर फि र
छा जाता है सुनसान मन पर
हवा हिलोंरे देकर जगा जाती है ।
यादों के सांए से गुजर कर
यूं हवा चुप चली जाती है ।

3 Comments

  1. अकिंत कुमार तिवारी 17/06/2016
  2. babucm babucm 17/06/2016

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