यादें – अनु महेश्वरी

याद आते है मुझे ,
बचपन के वो दिन।

वह लालटेन की रोशनी में बीती राते ,
दोस्तो के साथ छुपाछुपी खेलना,
याद आते है मुझे।
मा का हाथ पकड़ स्कूल जाना ,
रात में कहानिया सुनकर सोना,
याद आते है मुझे।
टेलेविशन का नहीं होना ,
रेडिओ पे ख़बरें सुनना ,
याद आते है मुझे।
सबसे रिश्ता जोड़ लेना ,
दूसरों को भी समय देना,
याद आते है मुझे।

अब नए ज़माने मे ,
लालटेन की जगह बल्ब ने ले ली ,
खेलों की जगह इंटरनेट ने ले ली।
कहानियाँ भी बीती बाते लगती ,
शाम का समय टेलिविशन ने ले लिया ,
व्हाट्सप्प एंड फेसबुक में ,
गपशप होने लगी अब ।
रिश्ता जोड़ते अब डर लगता,
न जाने कब कोई धोका दे दे ।

याद आते है मुझे ,
बचपन के वो दिन।

‘अनु माहेश्वरी ‘
चेन्नई

5 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 21/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/06/2016
  3. C.M. Sharma babucm 21/06/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/06/2016

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