पथजड़

पथजड़ सा लगे, हर तरफ कुछ कमी सी लगे
पत्ते पड़े फूल ना दिखे, सुना सारा जहान सा लगे।

जिदंगी की हंसी मे कुछ कमी सी लगे
बिन सवान धरती अधुरी सी लगे।

हर तरफ हैं खामोशि , प्यार मे कमी सी लगे
दिलों में आई बेवफाई, प्यार की कांतिल सी लगे।

अपने इरादो से अब जाने कितने हटने लगे
बेवफाओ के नाम पर अब जाने कितने मरने लगे।

जिसने रखा हौसला इस दौर में
उन्हे हर पल अब सावन सा लगे।

:-अभिषेक शर्मा

17 Comments

  1. आदित्‍य 16/06/2016
  2. आदित्‍य 16/06/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/06/2016
  4. योगेश कुमार 'पवित्रम' 17/06/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 17/06/2016
  6. C.M. Sharma babucm 17/06/2016
  7. mani mani 17/06/2016
  8. विजय कुमार सिंह 17/06/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/06/2016

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