“जिदंगी “

मुझे जिदंगी की समझ ही नही,
जो पल पल यु सता रही है ।
ये कभी राह मे डगमगाने लगी,
और सितम ढा के मुझको बता रही है ।
वो ऑसुओ के संग ऑखो मे बस गये ,
और बह बह कर दामन छुड़ा रही है ।
मुझे जिदंगी की यु समझ ही नही,
जो पल पल यु सता रही है ।।

काजल सोनी

15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/06/2016
  2. Kajalsoni 19/06/2016
  3. Kajalsoni 19/06/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/06/2016
  6. अकिंत कुमार तिवारी 19/06/2016
  7. Kajalsoni 19/06/2016
  8. Kajalsoni 19/06/2016
  9. mani mani 19/06/2016
  10. Kajalsoni 19/06/2016
  11. babucm C.m.sharma(babbu) 19/06/2016
  12. Kajalsoni 19/06/2016
  13. Kajalsoni 19/06/2016

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