जले बचपनों की ये परछाइयाँपरछाइयाँ…

जले बचपनों की ये परछाइयाँ
-अरुण कुमार तिवारी

ग़रीबी की करतूत देखी है हिलती,
जले बचपनो की ये परछाइयाँ
ये परछाइयाँ….

कहीँ केतली को उठाये नज़ारे,
है जूठे निवालों में सिमटा वो पोषण|
नज़र के सवालों लपेटी हंसी वो,
उदर की क्षुधा में परोसा वो शोषण|
है रौनक कहाँ खो गयी ज़िन्दगी से,
मासूम बचपन खिली झाइयाँ,
जले बचपनो की ये परछाइयाँ|

गरीबी की करतूत देखी है हिलती,
जले बचपनों की ये परछाइयाँ|

हो जाड़े के दिन या ठिठुरती वो रातें,
फ़टे कुछ लबादों में सिमटे ये बचपन|
सिसकती झिझकती तरसती ये आँखें,
निशानी उठाये सुलगता ये तन मन |
हिलाते पसलियों से तकती सी रिसती,
उम्मीदों भरे पग की बेवाइयाँ|
जले बचपनों की ये परछाइयाँ,

गरीबी की करतूत देखी है हिलती,
जले बचपनों की ये परछाइयाँ|

निरखते कहाँ झुक रहे छोटे कन्धे,
वजन सभ्यता का उठाये उठाये |
अँधेरी दुकानों के अंधे ये मालिक,
बड़प्पन लुटाए तमाशा दिखाएँ|
कहाँ हैं वतन के नियामी नियन्ता?
दिखाए कोई अर्थ की खाइयाँ!
दिखाए कोई अर्थ की खाइयाँ…….!!
………………
जले..बचपनो..की..ये..परछाइयाँ|

गरीबी की करतूत देखी है हिलती,
जले बचपनों की ये परछाइयाँ|

-‘अरुण’
——————–0——————

15 Comments

  1. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 16/06/2016
  2. babucm babucm 16/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  4. mani mani 16/06/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  6. विजय कुमार सिंह 16/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  8. Awasthi 16/06/2016
  9. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 16/06/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 17/06/2016

Leave a Reply