दिल को खिलौना क्यूँ बनाया

बात ख्यालों की हुयी तो यह ख्याल आया,
दरम्यां मोहब्बत के हमारे क्यों सवाल आया,
प्यार में शक की कोई रवायत नहीं होती,
दिलों के मेल में कोई शिकायत नहीं होती,
हमारे प्यार के बीच कोई किस तरह आया ,
सवाल अपना था तो दूसरों को क्यूँ भाया,
कांच को टूटकर बिखरते देर नहीं लगती,
फिर दिल को खिलौना तुमने क्यूँ बनाया ।

विजय कुमार सिंह

15 Comments

    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  1. आदित्‍य 15/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  2. आदित्‍य 15/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी arun kumar tiwari 15/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  6. C.M. Sharma babucm 16/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 16/06/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 17/06/2016

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