मस्त हवा

मस्त हवा

उनके लाल कपोलों को
छुकर आई है ये हवा,
मन धडक़ाये, तन महकाए
कैसी चलती है शीतल हवा ।
इस ठंडी हवा में भी
ताजगी का ऐहसास है
वो खुद चली आ रही है
ऐसा हुआ आभास है ।
मन प्रफु ल्लित है जैसे हुआ ।
मन धडक़ाये, तन महकाए
कैसी चलती है शीतल हवा ।
मन ही मन मुस्काती होगी
इंतजार होगा उसे भी मेरा
तन से चादर लपेटती हुई
ध्यान करती होगी वह मेरा
चाहती होगी बाहों में भरना ।
मन धडक़ाये, तन महकाए
कैसी चलती है शीतल हवा ।
रूख बदल कर यहीं से अपना
तुु वापिस उनके पास जा
मन धडक़ा कर तुम उनका
उनको मेरी याद दिलाना
मिलेंगे बहुत जल्द ये कहना ।
मन धडक़ाये, तन महकाए
कैसी चलती है शीतल हवा ।

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