आसाँ नहीं ।

कभी इक शब के लिए, नींद रहमत कर मेरे मौला,
रोज़ आसाँ नहीं, जी ने के नए बहाने ढूंढ़ना…!

शब = रात; रहमत = कृपा;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १२ जून २०१६.

RAHAMATT

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/06/2016
    • Markand Dave Markand Dave 16/06/2016

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