छुप.छुपाई

इष्क में छुप छुपाई कबतक
रिक्स में बाय बाय कबतक ।।

डरना अब क्या इस जमाने से
कौन बच पाया भला निषाने से ।
जीवन की पटरी में रेल बन जाओ
बाती जलती रहेगी तेल बन जाओ ।
इस तरह जग हंसाई कबतक
रिक्स में बाय बाय कबतक ।।

बिन पैसे की षादी कोर्ट में जाओ
सैर करने अब एयरपोर्ट में जाओ ।
अपने दम पर कुछ कर दिखाओ
षान से फिर लौटकर घर आओ ।
हिन्दु मुष्लिम सिख इसाई कब तक
रिक्स में बाय बाय कबतक ।।

बोझ न बनना कभी किसी का
खोज न बनना कभी किसी का ।
ज्ीना है तो अब घुल मिल जाओ
फूल चमन सा तुम खिाल जाओ ।
तडप मिलन दुख दुखाई कब तक
रिक्स में बाय बाय कबतक ।।

ऐसा कुछ भी काम न करना
अपने को बदनाम न करना ।
एक पतंग एक डोर बन जाओ
चाॅदनी का तुम चकोर बन जाओ ।
प्यार में यूॅ जुदाई कब तक
रिक्स में बाय बाय कबतक ।।

बी पी षर्मा बिन्दु

Writer – Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)

3 Comments

  1. विजय कुमार सिंह 14/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/06/2016

Leave a Reply