मन उदास सा क्यूँ है

मन बहुत उदास-उदास सा क्यूँ है,
तन बिल्कुल बेजान सा क्यूँ है ।
धड़कनें अब खामोश सी लगती हैं,
दिल तुम्हारे आस-पास सा क्यूँ है ।
आते-जाते दिख रहे हैं लोग कितने,
राहें गुमसुम, खामोश सी क्यूँ हैं ।
बेचैनी भरा मौसम हो चला है अब,
हवाएँ आज थम गयी सी क्यूँ हैं ।
वादा भूल गयी या भुला दिया तुमने,
चाहत में दिख रही कमी सी क्यूँ है ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

    • विजय कुमार सिंह 14/06/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 14/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 14/06/2016

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