नन्ही परी-2

ऐ माँ मैँ तेरी नन्ही परी,
फ़िक्र तेरी है जायज़, पर कुछ सवाल है मेरे तुझसे,
कोख में मुझे मारा जाता,
तब तू क्यों नहीं कुछ बोलती ?
जन्म जब लेती हु मैँ,
वंश आगे कैसे बढ़ेगा चिंता तुझे क्यों सताती ?
पार्टी कर दी,
लडु बाँट दिए लड़का होने पर,
मेरी बारी क्यों अधमरी सी ख़ुशी तेरे चेहरे पर आती ?
मान-मर्यदा की फ़िक्र, सौ सवाल मुझसे पूछ लेती,
तनिक देर मुझसे हो जाती ?
घुट कर क्यों रह जाती चीखे तेरी घर के अंदर,
लोग क्या कहेंगे ? कहाँ जाएगी तू ?
क्यों नारी ही नारी को अपने असहाय होने का अहसास करवाती ?
बलात्कार, यौन-शोषण, अप्सब्द,
के खिलाफ तू क्यों नहीं आवाज़ उठाती ?
तू चंडी, तू दुर्गा,
क्यों नहीं अपना विकराल रूप दिखाती ?
गर तुझे मेरा भविष्य है सुधारना,
नारी को नारी का साथ देना होगा,
खुद के असहाय होने का, दाज प्रथा का कलंक मिटाना होगा,
फिर ना मुझे छुपाने की जरूरत होगी,
ना मेरे दाज की फ़िक्र होगी
ऐ माँ मैँ तेरी नन्ही परी,
फ़िक्र तेरी है जायज़, पर कुछ सवाल है मेरे तुझसे,

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/06/2016
    • mani mani 13/06/2016
  2. C.M. Sharma babucm 14/06/2016
    • mani mani 14/06/2016
    • mani mani 14/06/2016

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