ख्वाहिश यादों की

अपनी यादों में हम खुद की, एक मजार बनायेंगे।
उन्हें हरदम रहे जो याद, एेसा कुछ कर गुजर जायेंगे।।
नफरतों मे भी किया करते हैं प्यार, इस जहाँ को बतायेंगे ।
है जो बंदिशों मे दिल के जज्बात, हम इस जहाँ को सुनायेंगे ।।
करते हैं प्यार उन्हें हम इसकदर , लहू से आज लिख जायेंगें ।
उनका दिल बेशक ना हमारा हो ,उनकी यादों को साथ ले जायेंगे।।
मोहब्बत तो नाम है रब का, इसमें हम दुनियाँ को भूल जायेंगे।
रखना उनको है अब पलकों मे , दुअा एे रब से कर के जायेंगे।।
मन्नतें पूरी तु करदे मेरे मौला, नई दुनियाँ तो फिर हम बसायेंगे ।
मुझको अता कर एैसी दुनियाँ मौला , जहाँ महबूब की यादों को हम सजायेंगे ।।
श्रीकांत मिश्रा

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 13/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/06/2016
  4. C.M. Sharma babucm 14/06/2016

Leave a Reply