खुशी बेटी की

मै बेटी बनकर जन्म लिया, खुशियोँ का सम्मान है पाया।
माँ की अँखो मे ममता का जल, बाबुल के सीने मे गर्व है पाया।।
अो बाबुल तेरे अंगना मे, मै ने खुद को महफूज है पाया।
तेरे इस बलिदान से मईया, मैने तो है ये जन्म पाया।।
।। मै बेटी बनकर जन्म लिया, खुशियोँ का सम्मान है पाया।।
मै तो नन्ही गुडिया अपने बाबुल की, जिनकी बाँहों का झूला है भाया।
मै सखी सहेली मईया की, जिसने मुझको हर बात सिखाया।।
मुश्किल भरे हों राह कहीं तो, हमने वहाँ खुद को तुझको है पाया।
बाबुल के हर सपने को, हमने मेहनत से है साकार बनाया।।
।। मै बेटी बनकर जन्म लिया, खुशियोँ का सम्मान है पाया।।
मुझको बाबुल का घर है प्यार, बचपन मेरा है यहाँ समाया ।
मईया की हर सीख निराली, जिनसे मुझ मे ये गुण है आया।।
हैं कितने एहसान तुम्हारे, इस धरती पर है मुझको लाया।
बेटे जैसा अधिकार दिलाकर, मुझ बेटी का मान बढाया।।
।। मै बेटी बनकर जन्म लिया, खुशियोँ का सम्मान है पाया।।
ईजी. श्रीकांत मिश्रा

2 Comments

  1. विजय कुमार सिंह 13/06/2016
  2. C.M. Sharma babucm 14/06/2016

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