भीगा तन

भीगा तन

बारिश में भीगा हुआ तन
ऊपर से चंचल चितवन
इतनी सुन्दर देह निराली
हर लेती है मेरा जो मन ।
गोरा सुन्दर लाल है चेहरा
उस पर बालों का पहरा
कोई भंवरा उसे चूम ना ले
फू ल समझ कर गालों को
इसलिए करते इसकी रक्षा
देखो तो भोली वो सूरत
हो जाता है सबका होश गुम।
इतनी सुन्दर देह निराली
हर लेती है मेरा जो मन ।

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