जीवन का संतुलन – अनु महेश्वरी

इतना भी ना झुको की जड़ से टूट जाएँ ,
इतना भी ना अकङ की सबका साथ छूट जाएँ।
इतना मीठा भी ना बोलो की मधुमेह हो जाएँ ,
इतना कड़वा भी ना बोलो की जहर बन जाएँ।

‘अनु माहेश्वरी ‘
चेन्नई

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/06/2016
  2. C.M. Sharma babucm 18/06/2016
  3. अकिंत कुमार तिवारी 18/06/2016

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