गरम पवन

गरम पवन

ऊष्ण होकर बह पवन
क्यों ठंड संग लाती है,
ठंड के मारे हाल बुरा है
कंपकंपी बंध जाती है ।
यहां जंगल बियाबान में
हूं तुम पर ही मैं आश्रित
तुम ही यदि दोगी धोखा
हो जाऊंगा मैं स्वयं अधीर
आकर बंधाओं मेरी धीर
क्यों मुझे आज रूलाती है ।
ठंड के मारे हाल बुरा है
कंपकंपी बंध जाती है ।

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  1. babucm babucm 13/06/2016

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