आखिरी मन्जिल

चल चलाचल मुसाफिर तु जीन्दगी की शाम तक।.
मन्जिल का पता हो न हो चलना है आखिरी सांस तक।
खेल खत्म होंगे यहीं पर सब रहना अपनी औकात तक।.
वक्त मुकर्र है मौत का पता नही चलता उसके आने तक।. Ashfaque khopekar:

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