“सिलसिला”

लूट का सिलसिला अब भी क्यों जारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
बास्को डिगामा अमीर भारत खोजा सबसे पहले
मुगल षासक फिर अंग्रेज आए नहले पे दहले
पैर जमाया लालच देकर लगा अधिकार जमाने
फूट डालकर लोगो में उसने जूल्म को ढ़ाने
चुप चाप रहा इंसान बड़ा लाचारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
खोदकर किला तोड़ तोड़कर लूटा अपना देष
चील कोैए की तरह आकार टूटा बदलकर वेष
बर्शेा गुलाम की बेड़ियों में बंधे रहे हम
आॅख रहकर भी उनके सामने अंधे रहे हम
पा्रण की आहुति वतन के लिए आभरी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
उनको षत् षत् नमन जिसने मुझे आजादी दी
भारत माता की जय के लिए जिसने गाॅधी दी
कितने षहिद कितने फांसी पर लटक गये
कितने संहले अपने आप और कितने भटक गये
संहलते क्यों नहीं हम सब मति मारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
गोदें सुनी हुई और कितने सुहाग उज़ड गये
अंग्रेज तंग होकर भागे और उज़ड़ गये
लहु लुहान धरती खून से रंग गई थी
आपस की तकरार में पाकिस्तान बंग गई थी
रईस के नाना बन गये जो अधिकारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
कानून अपने हाथ में लेकर करने लगे मनमानी
फूट डालकर चले गये अंग्रेज लालच और बेईमानी
षरीफों के लिए संविधान बनाया भीम राव अम्बेडकर
कानून को अंधा बनाया किसी ने रख दिया कुरेदकर
हनन हो रही मानवता कहाॅ गयी यारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
जिसको अधिकार मिला उसी नी लुटिया डुबोई
खादी खाकी मिलकर भी बचा न पाया कोई
अछुता नहीं रहा कहीं घोटालो और हवालो से
हर दफतर परेषान है भइया इनके भी दलालो से
एक हाथ कट्टा और एक हाथ कटारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।
हर तरफ करपषन और हर जगह लड़ाई है
हर मोड़ पर बेरोजगारी हर चैक मंहगाई है
जीना मुष्किल लगता है इस तरह जमाने से
पेट भी नहीं भरता दिन दिन भर कमाने में
दुनिया में ऐसे ही आतंकवाद का रंगदारी है
देष पर गुण्ड़ा राज आज भी क्यों भारी है ।

बी पी षर्मा ; बिन्दु

Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)

5 Comments

  1. C.M. Sharma C.msharma(babbu) 12/06/2016
  2. C.M. Sharma C.msharma(babbu) 12/06/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 12/06/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
  5. C.M. Sharma C.msharma(babbu) 12/06/2016

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