अहसास

ग़लती का अहसास

एक बच्चे से जब कभी कोई ग़लती हो जाती है और उसके माँ बाप या teacher उसे डाँटते है तो उसके अंदर जो भाव या जो विचार आते है उसका poetic description करने का प्रयास कर रहा हूँ अगर पसंद आए और दिल को छुए तो please होंसला बढ़ाना ।

मुझे है अपनी ग़लती का पूरा अहसास ,
मैंने तो किया था एक छोटा सा प्रयास ,
अनजाने में हो गई मुझसे एक चूक ,
जिस पर ग़ुस्सा होकर मुझे बना दिया मूक,
ग़लती नहीं करूँगा तो कैसे मैं सीखूँगा,
सुधारोंगे नहीं तो आगे कैसे मैं लिखूँगा ,
माँ के पेट से तो नहीं आता है कोई सीख कर,
अभ्यास करता है वह ग़लत सही लिख लिख कर,
चक्रव्यूह में प्रवेश करना ही सीख पाया था वह गर्भ में रहकर ,
चारों दिशाओं से घिर गया वह ,बाहर निकलना बना उसके लिए दुष्कर ,
वीर अभिमन्यु ने दे दी निडर होकर अपने प्राणो की आहुति,
महाभारत के इतिहास में जगा गया अपनी वीरता की ज्योति।

Don’t nip in bud the creativity of a child or a learner,
गिर गिर कर उठते थे ,फिर भी अंदर थी एक बहुत बड़ी ललक,
गुप चुप दबे पाँव लेकर उसे निकल जाते थे जैसे झपकती थी parents की पलक,
ख़ाली सड़कों और मैदान में उसके साथ शुरू हो जाता था हमारा अभियान ,
साइकिल सीखने की होड़ में नहीं रहता था आगे पीछे का कुछ भी ध्यान ।
गिरते पड़ते चोट खाते हम ,
फिर भी हिम्मत न होती कम,
साइकिल अक्सर हो जाती ख़राब ,घर में भी पड़ती करारी डाँट,
फिर भी साइकिल सीखने की बेक़रारी जोहती next day की बाट।
हमें हालाँकि सदा रहता अपनी असफलता का अहसास,
फिर भी जारी रहता सीखने का हमारा अथक प्रयास।

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/06/2016
    • Satish 12/06/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
  3. Satish 12/06/2016
  4. C.M. Sharma C.msharma(babbu) 12/06/2016
    • Satish Chandra Jain Satish Chandra Jain 12/06/2016
  5. Akhil 12/06/2016

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