मेघा रे मेघा रे

मेघा रे मेघा रे जम के बरसना अब की बार !
उझडे किसानों का न बचा किसी पर एतबार !
उम्मीद है तुझी से बचा कूचा है थोड़ासा कारोबार !
मर जायेंगे वरना सब तू जल्दी आज अब की बार !
[अशफाक खोपेकर]

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.m. sharma(babbu) 11/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/06/2016

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