जिंदगी जीने नहीं देती

जिंदगी जीने नहीं देती, मौत कहती है ठहर जा,
घर में चिंताएं समातीं, पत्नी कहती है इधर आ,
सुबह होती, कदम कहते बैग उठा काम पे जा,
रात होती तो सपने आकर लेते नींदों को चुरा,
गम की दवा बोतलों से झूमती कदमों में आ,
जमाना सामने आ कहता, वक़्त है सुधर जा,
मैं, कब, किसे, कैसे समझाउं अपनी व्यथा,
सब हैं अपने में लीन, सबकी है अपनी कथा ।

विजय कुमार सिंह

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 10/06/2016
  2. C.M. Sharma C.m. sharma(babbu) 10/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 11/06/2016
  3. अभिषेक शर्मा ""अभि"" अभिषेक शर्मा 10/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 11/06/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016

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