तुम्हारी आँखों से गिरकर

तुम्हारी आँखों से गिरकर मिटटी में मिल गया,
रवि ने छटा बिखेरी तो बादल निगल गया,
पवन के साथ दौड़ लगा दूर निकल गया,
पर्वत ने रास्ता रोका तो बादल फट गया,
तूफानी बारिस में फिर रूप पिघल गया,
बस इतनी खता थी पलकों से फिसल गया ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 10/06/2016
  3. babucm C.m. sharma(babbu) 10/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 11/06/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016

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