बेजुबानों का संहार

बेजुबान पशुओं का करते इतना बड़ा संहार,
खुद ही कहते हमलोग तो सबसे करते प्यार ।
इंसानी आबादी इतनी उसकी नहीं है रोक-थाम,
पशुओं की बढ़ी आबादी तो लेने लगे इंतकाम ।
राह और भी मिल जाती छोड़ के नृशंस काम,
टीकाकरण करके संख्या की करते रोक-थाम ।
मानव संख्या नियंत्रण को औषधि की भरमार,
नहीं कोई कानून जो इसे रोकने को हो तैयार ।
अहिंसक पशुओं की हत्या का ये कैसा कानून,
उन्हें इस तरह मिटाने का सर पर चढ़ा जुनून ।
देश में समस्याओं की लम्बी-चौड़ी फेहरिस्त,
जनसँख्या से जुडी है हर समस्या की क़िस्त ।
फिर खुद के नियंत्रण पर क्यों नहीं देते ध्यान,
अपना ज्ञान परिभाषित कर मार रहे बेजुबान ।

विजय कुमार सिंह

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 10/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/06/2016
  4. C.M. Sharma C.m. sharma(babbu) 10/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 11/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
    • विजय कुमार सिंह 12/06/2016

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