तेरे शहर मे गुज़ारी थी मैने एक जिंदगी

तेरे शहर मे गुज़ारी थी मैने एक जिंदगी
पर कैसे कह दूं हमारी थी एक जिंदगी ||

जमाने से जहाँ मेने कई जंग जीत ली
वही मोहब्बत से हारी थी एक जिंदगी ||

मुझको ना मिली वो मेरा कभी ना थी
तुमने जो ठुकराई तुम्हारी थी जिंदगी ||

महल ऊँचा पर आंशु किसी के फर्स पर
तब मुझको ना गवारी थी एक जिंदगी ||

कलम की उम्र मे पत्थर उठा रही है
कितनी किस्मत बेचारी थी एक जिंदगी||

तेरे शहर मे गुज़ारी थी मैने एक जिंदगी..

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/06/2016
    • shivdutt 10/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2016
    • shivdutt 10/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/06/2016
    • shivdutt 10/06/2016
  4. babucm C.m. sharma(babbu) 11/06/2016

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