कमल की कलम : भाग 4

मोहब्बत यूं ही बेवफा कहां होती है
इश्क की आग तो यहां तन्हा रोती है
मुकद्दर तो मोम का भी देखा हमने
पिघलता है मगर निशानियां रहती है॥

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