कमल की कलम : भाग दो

वीराने समन्दर में
तन्हाई बसती है

कहकशा हो तो
दुनिया हंसती है

हर शख्स सिमटा
तौल बाज़ारों में

सिक्कों की आवाजें
वीरानों में गूंजती हैं॥

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